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लेमरू में 4 साल पहले पिता व नातिन की हत्या कर नाबालिग बेटी से सामूहिक दुष्कर्म के बाद पत्थर से दबाकर मार, 5 आरोपी को मृत्युदंड, 1 को आजीवन कारावास 

फास्ट ट्रैक कोर्ट का फैसला, रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस मानकर दी गई सजा, तत्कालिन सीएसपी योगेश साहू ने की थी विवेचना, शासकीय अभिभाषक सुनील कुमार मिश्रा ने की पैरवी 

कोरबा। लेमरू के जंगल में 4 साल पहले पिता व 4 साल की नातिन की हत्या के बाद किशोरी से सामुहिक दुष्कर्म करके पत्थरों के नीचे दबा दिया गया था। पीड़िता की मौत हो गई थी। मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस मानते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 5 आरोपी को मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

घटना कोरबा के लेमरू थाना क्षेत्र में 4 साल पहले 29 जनवरी 2021 को हुई थी। जहां देवपहरी निवासी एक ग्रामीण को बहाने से उसकी 16 वर्षीय बेटी व 4 साल की नातिन के साथ 6 लोग जंगल ले गए। जहां पहुंचते ही पिता व नातिन की सिर कुचलकर हत्या कर दी गई। वहीं किशाोरी से सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। घटना को अंजाम देने के बाद मौके पर किशोरी के ऊपर पत्थर रखकर उसे दबा दिया गया था। खोजबीन के दौरान 6वें दिन पुलिस घटनास्थल पर पहुंची तो पीड़िता गंभीर हालत में मिली थी। जिसे अस्पताल भेजा गया लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई थी। मामले की सुनवाई जिला न्यायालय के फास्ट ट्रैक कोर्ट (पाक्सो) में चल रही थी। सुनवाई के दौरान मामले में दोष सिद्ध हो गया। कोर्ट की न्यायाधीश डॉ. ममता भोजवानी ने केस को रेयरेस्ट ऑफ रेयर मानते हुए सजा सुनाई। जिसमें सतरेंगा निवासी 5 आरोपी संतराम मंझवार (45), अनिल कुमार सारथी (20), आनंद दास (22), परदेशी दास (35) व अब्दुल जब्बार (21) को मृत्युदंड की सजा सुनाई। वहीं एक आरोपी उमाशंकर यादव (22) को आजीवन कारावास की सजा दी गई। न्यायाधीश ने 208 पेज के आदेश में कंडिका 219 में यह भी उल्लेख किया है कि आरोपीगण को उनके गर्दन में फांसी लगाकर तब तक लटकाया जाए तब तक उनकी मृत्यु न हो जाए।

 

पढ़िए घटना की पूरी इनसाइड स्टोरी, कैसे हुई वारदात और कैसे पकड़े गए गुनाहगार…

 

पहाड़ी कोरवा परिवार जिसके पास करता था काम उसने ही साथियों के संग दी थी वारदात को अंजाम, वजह किशोरी से बनाना चाहता था दूसरी पत्नी, परिवार नहीं था तैयार, साथियों के साथ रचा था षड्यंत्र 

 

कोरबा के इतिहास में दूसरी बार दी गई फांसी की सजा

कोरबा। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सतरेंगा में रहने वाले जिन 5 आरोपी को फांसी की सजा दी है उन्होंने लेमरू के जंगल में 4 साल पहले पहाड़ी कोरवा ग्रामीण और उसकी नातिन की बेरहमी से हत्या करके बाद उसकी पुत्री से सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया था।

लेमरू थाना क्षेत्र के देवपहरी गांव निवासी 45 वर्षीय पहाड़ी कोरवा अपनी पत्नी, 16 वर्षीय बेटी, डेढ़ साल के पुत्र व 4 साल की नातिन के साथ सतरेंगा में संतराम मंझवार (45) के घर में रहकर काम करता था। 4 साल पहले 29 जनवरी को संतराम ने काम नहीं होने की बात कहते हुए परिवार को गांव जाने के लिए कहा था। ग्रामीण वहां से पैदल अपने गांव जाने के लिए रवाना हुआ और रास्ते में बस का इंतजार कर रहा था।  तब रास्ते में संतराम अपने 5 साथियों के साथ दोपहिया वाहनों में पहुंचा। वे उन्हें गांव तक छोड़ने की बात कही। उनका एक साथी उमाशंकर ग्रामीण की पत्नी व बेटा को अपने वाहन में बैठाकर अपने साथ लेकर आगे रवाना हुआ। जबकि ग्रामीण को उसकी बेटी व नातिन को बिठाकर संतराम जंगल की ओर ले गया। जहां उसने अपने साथियों के साथ षडयंत्र के तहत वारदात को अंजाम दिया था। ग्रामीण व मासूम बच्ची की बेरहमी से हत्या करने के बाद आरोपियों ने सामूहिक रूप से किशोरी से दुष्कर्म किया। इतना ही नहीं बेहोशी की हालत में उसके ऊपर बड़े-बड़े पत्थर लाद दिए गए थे जिससे वह 5 दिनों तक टस से मस नहीं हो सकी। पुलिस जब घटनास्थल पहुंची तो वह मौत से लड़ते हुए कराह रही थी। उसे तत्काल अस्पताल भेजा गया लेकिन रास्ते में उसने दम तोड़ दिया था। मुख्य आरोपी संतराम के यहां रहकर पहाड़ी कोरवा परिवार काम करता था। जिनकी 16 वर्षीय नाबालिक बेटी पर संतराम की नीयत खराब हो गई थी। उसने परिवार को उसे अपनी दूसरी पत्नी बनाना चाहता था लेकिन किशोरी समेत परिवार ने साफ इनकार कर दिया था। तब से वह किशोरी और उसके पिता से बदला लेने का षड्यंत्र रचा। जबकि परिवार उसके षड्यंत्र से अनजान था।

सीएसपी योगेश साहू ने की थी मामले की जांच, पुख्ता साक्ष्य जुटाया

वारदात के दिन पत्नी अपने बेटे के साथ गांव पहुंची लेकिन पति समेत बेटी व नातिन नहीं पहुंची तो महिला अगले दिन महिला मालिक संतराम के घर पहुंची। पूछने पर उसने उन तीनों को गांव के पास छोड़कर लौटने की बात कही। महिला लेमरू थाना पहुंचकर जानकारी दी। तब कोरबा के तत्कालिन सीएसपी योगेश साहू के नेतृत्व में पुलिस टीम ने रास्ते के आसपास जंगल में सर्चिंग की। 5वें दिन पुलिस घटनास्थल पर पहुंची जहां पीड़िता पत्थर से दबी हुई गंभीर हालत में मिली और पास ही उसके ग्रामीण व उसके नातिन का सिर कुचला हुआ शव पड़ा था। मामले में तत्कालिन सीएसपी साहू के नेतृत्व में जांच हुई थी और पुख्ता साक्ष्य जुटाया गया था। जांच टीम में तत्कालिन निरीक्षक दुर्गेश शर्मा, निरीक्षक एसएस पटेल, एएसआई जितेन्द्र यादव समेत अन्य अधिकारी कर्मचारी भी शामिल थे। वहीं वर्तमान में कोर्ट में शासकीय अभिभाषक सुनील कुमार मिश्रा ने पैरवी कर दोष साबित करने में अहम भूमिका निभाई।

पत्नी व बच्चों को मारने वाले पति को हुई थी फांसी

कोरबा में करीब 8 साल पहले पहली बार पत्नी व दो बच्चों के हत्या के मामले में आरोपी पति को फांसी के सजा हुई थी। सोमवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने ऐसा ही दूसरा फैसला सुनाया है। आरोपियों ने जिस नृसंस तरीके से वारदात को अंजाम दिया उसे कोर्ट ने रेयरेस्ट ऑफ रेयर माना है। मामले में कोर्ट में 5 दिन पहले 15 जनवरी को हुई सुनवाई के दौरान आरोपियों पर दोष सिद्ध हो गया था। न्यायाधीश डॉ. ममता भोजवानी ने सोमवार को सजा सुनाई।