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कोरबा को बड़ी सौगात: चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन परियोजना को मंजूरी, बढ़ेगी कोयला परिवहन क्षमता


755 करोड़ की लागत से 42 किमी तीसरी लाइन बनेगी, माल ढुलाई और ट्रेनों की रफ्तार में होगा बड़ा सुधार

कोरबा। कोयला परिवहन क्षमता बढ़ाने और रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए भारतीय रेल ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत चांपा-कोरबा तीसरी लाइन रेल परियोजना को मंजूरी दे दी है। करीब 42 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की अनुमानित लागत 755 करोड़ रुपए तय की गई है।

इस परियोजना के तहत चांपा से कोरबा के बीच तीसरी रेलवे लाइन का निर्माण किया जाएगा। हालांकि, पहले से स्वीकृत मडवारानी-सरगबुंदिया सेक्शन को इसमें शामिल नहीं किया गया है। यह कॉरिडोर भारतीय रेल के मिशन 3000 एमटी और हाई डेंसिटी नेटवर्क (HDN) योजना के तहत चिन्हित किया गया है, जिसका उद्देश्य देश में माल ढुलाई क्षमता बढ़ाना और बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है।
कोरबा जिला देश के प्रमुख कोयला परिवहन केंद्रों में गिना जाता है, जहां बड़ी संख्या में थर्मल पावर प्लांट संचालित हैं। चांपा-कोरबा रेलखंड साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड और महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड के कोयला क्षेत्रों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क और मुंबई-हावड़ा हाई डेंसिटी कॉरिडोर से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
वर्तमान में इस सेक्शन पर प्रतिदिन लगभग 10 जोड़ी यात्री ट्रेनें और 55 जोड़ी मालगाड़ियां संचालित हो रही हैं। एसईसीएल और एमसीएल की कुल कोयला उत्पादन क्षमता करीब 247 मिलियन टन प्रतिवर्ष (MTPA) है, जो आने वाले वर्षों में बढ़कर लगभग 450 MTPA तक पहुंचने का अनुमान है। इससे अतिरिक्त 200 MTPA कोयला परिवहन का दबाव बढ़ेगा।
रेलवे के अनुसार तीसरी लाइन बनने से इस सेक्शन की परिवहन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही ट्रेनों के संचालन में लचीलापन आएगा और मालगाड़ियों व यात्री ट्रेनों की गति में सुधार होगा। परियोजना पूर्ण होने के बाद प्रत्येक दिशा में प्रतिदिन दो अतिरिक्त यात्री ट्रेनें चलाने की संभावना है, वहीं 5.95 MTPA अतिरिक्त माल ढुलाई संभव हो सकेगी।
इस परियोजना से रेलवे को सालाना लगभग 85 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है, जिसमें 82 करोड़ रुपए माल परिवहन और 3 करोड़ रुपए कोचिंग सेवाओं से प्राप्त होंगे। इसके अलावा, मालगाड़ियों के रुकने में कमी आने से संचालन लागत में भी लगभग 1.30 करोड़ रुपए की सालाना बचत होने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, चांपा-कोरबा तीसरी लाइन परियोजना से न केवल क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी, बल्कि देश की ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था को भी मजबूत आधार मिलेगा।

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