मेडिकल कॉलेज को मिली 3 नई बसें 6 माह बाद भी सड़क पर नहीं उतरी, रजिस्ट्रेशन नंबर का इंतजार


एसईसीएल गेवरा क्षेत्र से सीएसआर मद से किया गया है प्रदाय, ड्राइवर-कंडेक्टर भी नियुक्त, किराए के बस के भरोसे व्यवस्था
कोरबा। मेडिकल कॉलेज के छात्रों के आवाजाही के लिए एसईसीएल गेवरा क्षेत्र द्वारा 6 माह पहले प्रदाय किए गए 3 नई बस सरकारी रजिस्ट्रेशन नंबर के इंतजार में अब तक सड़क पर नहीं उतरी हैं। दूसरी ओर व्यवस्था किराए के बस के भरोसे चल रही है।

कोरबा मेडिकल कॉलेज का अपना खुद का कैंपस निर्माणधीन है। वर्तमान में मेडिकल कॉलेज का संचालन आईटी कॉलेज परिसर के बिल्डिंग में हो रहा है तो अस्पताल के संचालन के लिए जिला अस्पताल को संबद्ध किया गया है। आईटी कॉलेज परिसर में स्थित गल्र्स व ब्यॉज हॉस्टल का संचालन भी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन द्वारा अपने छात्रों के लिए किया जा रहा है। लेकिन कॉलेज में 4 सत्र का संचालन होने और हॉस्टल की क्षमता कम होने से परिसर से दूर भी हॉस्टल संचालित किया जा रहा है। जिसमें एक सुभाष चौक के पास स्थित वर्किंग वूूमेन हॉस्टल व गर्वहमेंट कॉलेज मैदान का हॉस्टल है, जहां छात्राओं को ठहराया गया है। उक्त छात्राओं को कॉलेज से हॉस्टल तक आवाजाही के साथ ही सीनियर छात्रों को क्लीनिकल ट्रायल के लिए कॉलेज परिसर के हॉस्टल से अस्पताल तक लाना और ले जाना पड़ता है। इसके लिए अब तक किराए के बस का उपयोग किया जा रहा है। जरूरत को देखते हुए एसईसीएल गेवरा क्षेत्र द्वारा सीएसआर मद से 3 नई बस प्रदाय किया गया है। 6 माह बाद भी उक्त बसों को सरकारी रजिस्ट्रेशन नंबर उपलब्ध नहीं हो सका है, जिसकी वजह से बसें सड़क पर नहीं उतरी हैं। ऐसे में किराया पर एक मात्र बस का परिचालन होने से छात्रोें को आवाजाही में परेशानी हो रही है। बस कई फेरा लगाती है, जिससे छात्रों को घंटों तक इंतजार करना पड़ता है।
सरकारी नंबर के साथ मिलेगी रियायत
एसईसीएल से मिली तीनों बसों के लिए ड्राइवर व कंडक्टर की नियुक्ति कर ली गई है, जो प्रतिदिन कॉलेज भी पहुंचते हैं। लेकिन रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट नहीं लगे होने की वजह से बसों को परिसर से बाहर नहीं ले जा सकते हैं। उन्हें भी रजिस्ट्रेशन नंबर लगने का इंतजार है। दरअसल सरकारी रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट लगने पर बसों को सरकारी वाहन की तरह फिटनेस, इंश्योरेंस समेत अन्य कार्याे में रियायत मिलेगी। इसलिए जिले का रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं लिया गया है।
निजी बस परिचालन से किराया का भार
वर्तमान में आईटी कॉलेज परिसर में संचालित मेडिकल कॉलेज से सीनियर बैच के 125 छात्रों को क्लीनिकल ट्रायल के लिए अस्पताल पहुंचाया जाता है। वहीं प्रथम व द्वितीय सत्र के छात्राओं को बाहर के हॉस्टल से कॉलेज पहुंचाया जाता है। बाद में उक्त सभी छात्रों को वापस भी छोड़ा जाता है। किराया में चल रही बस कई फेरा लगाती है। इस चक्कर में कॉलेज प्रबंधन पर किराया का भार पड़ रहा है।
नई बसों के संचालन से मिलेगी राहत
एसईसीएल से मिली नई बसों का संचालन शुरू होने से छात्रों को राहत मिलेगी। तीन बस होने से समय की बचत होगी। छात्र पढ़ाई व क्लीनिकल ट्रायल के लिए समय पर पहुंच सकेंगे, लंबे समय तक इंतजार करने की झंझट से मुक्ति मिल जाएगी।वहीं प्रबंधन को किराया भी नहीं देना पड़ेगा। एजुकेशनल टूर में भी सभी छात्र अलग-अलग बस में सवार होकर एक साथ एक जगह पहुंच सकेंगे।

