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रजगामार कांड: बच्ची की हत्या के मामले का 12 घंटे में खुलासा; आरोपी को गिरफ्तार कर निकाला गया जुलूस, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की उठी मांग

कोरबा। रजगामार क्षेत्र में हुई सात वर्षीय मासूम बच्ची के अपहरण और नृशंस हत्या के सनसनीखेज मामले में कोरबा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज 12 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। इस जघन्य अपराध के खुलासे के बाद सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत समेत स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिवक्ताओं ने कड़ा रुख अपनाते हुए मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने और आरोपी को फांसी की सजा दिलाने की मांग की है।

पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के अनुसार दिनांक 19 अक्टूबर 2026 को रजगामार क्षेत्र से बच्ची लापता हो गई थी। परिजनों की सूचना पर कोरबा पुलिस ने तत्काल भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2) के तहत अपराध दर्ज कर बच्ची की तलाश शुरू की। लगातार सर्चिंग के बाद दिनांक 22 अक्टूबर 2026 को रजगामार पुरानी बस्ती के पास जंगल से बच्ची का शव बरामद हुआ। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रकरण में BNS की धारा 103(1), 66 तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 4 व 6 जोड़ी गई।
कोरबा पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, लास्ट सीन थ्योरी और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर संदेही अमित चौहान की पहचान की। पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को बागो थाना क्षेत्र के सुदूर जंगल से दबोच लिया। मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डॉक्टरी मुलाहिजा के पश्चात वैधानिक अग्रिम कार्रवाई की जा रही है।

नगर निगम सभापति और अधिवक्ता संघ ने की मदद की घोषणा

इस हृदयविदारक घटना ने पूरे कोरबा को झकझोर कर रख दिया है। नगर निगम सभापति नूतन सिंह ठाकुर ने आरोपी की त्वरित गिरफ्तारी को संतोषजनक बताया है, लेकिन साथ ही मांग की है कि इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में की जाए। मासूम बच्ची के हत्यारे को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए सभापति नूतन सिंह ठाकुर के साथ कोरबा अधिवक्ता संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों समेत वरिष्ठ उपाध्यक्ष रवि शर्मा, महिला उपाध्यक्ष उर्मिला सिंह, और सहसचिव रवि भगत की एक विशेष टीम पीड़ित परिवार को हरसंभव कानूनी सहायता प्रदान करेगी। अधिवक्ता संघ के वरिष्ठ और महिला अधिवक्ताओं ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए आरोपी की पैरवी न करने का सराहनीय निर्णय लिया है। नूतन सिंह ठाकुर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि समाज में ऐसे दरिदों को जीवित रहने का कोई अधिकार नहीं है और हत्यारे को शीघ्र फांसी की सजा दिलाने के लिए निःशुल्क कानूनी मदद दी जाएगी।

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