हाथियों की दहशत के बीच इंसानियत की मिसाल, साजापानी में मनेगा नन्हे गजराज का छठी समारोह
25 अक्टूबर को होगा आयोजन, ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर की सामूहिक भोज की तैयारी; हाथी प्रभावित सात गांवों को भेजा न्योता
कोरबा। हाथियों की आवाजाही से प्रभावित गांवों में जहां अक्सर ग्रामीणों को जान-माल की सुरक्षा की चिंता सताती है, वहीं कोरबा जिले के करतला वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम साजापानी में इंसान और वन्यजीवों के बीच स्नेह की अनूठी मिसाल देखने को मिल रही है। जंगल में जन्मे नन्हे हाथी के स्वागत में ग्रामीणों ने इंसानी बच्चे की तरह उसकी छठी मनाने का निर्णय लिया है। इस अनूठी पहल की क्षेत्र में चर्चा हो रही है।
जानकारी के अनुसार, तीन दिन पहले ग्राम साजापानी के जंगल में एक मादा हाथी ने नन्हे शावक को जन्म दिया था। जन्म के बाद से ही नन्हा हाथी अपनी मां और दल के अन्य हाथियों के साथ आसपास के जंगलों में विचरण कर रहा है। शावक के जन्म की खुशी में ग्रामीणों ने आपस में बैठक कर छठी का कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला लिया।
25 अक्टूबर को होगा आयोजन, सामूहिक भोज की तैयारी
ग्रामीणों के निर्णय के अनुसार, 25 अक्टूबर, रविवार को मां काशीरानी मंदिर के नीचे स्थित गौठान, टिकरापारा में नन्हे गजराज की छठी मनाई जाएगी। कार्यक्रम को यादगार बनाने के लिए ग्रामीण स्वेच्छा से चंदा एकत्रित कर रहे हैं। आयोजन में शामिल होने वाले लोगों के लिए सामूहिक भोज की व्यवस्था भी की जा रही है।
सात गांवों में भेजा गया आमंत्रण
कार्यक्रम में आसपास के गांवों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए हाथी प्रभावित क्षेत्रों में आमंत्रण पत्र भेजे गए हैं। रामभाठा, लबेद, पहाड़गांव, काशींपानी, छातापाठ, जामपानी और भुईंचुवा सहित सात गांवों के ग्रामीणों को आमंत्रित किया गया है। इसके अलावा जिला प्रशासन के अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी न्योता भेजा गया है।
वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश
आमतौर पर हाथियों की आवाजाही से प्रभावित ग्रामीण इलाकों में लोगों को फसल और जान-माल के नुकसान की आशंका बनी रहती है। ऐसे में साजापानी के ग्रामीणों की यह पहल एक अलग संदेश दे रही है। नन्हे हाथी के जन्म की खुशी को सामूहिक उत्सव में बदलकर ग्रामीणों ने वन्यजीवों के प्रति प्रेम, संवेदना और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की भावना को सामने रखा है। इंसान और हाथी के बीच स्नेह का यह अनूठा रिश्ता अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।



