हाथियों के चक्कर में कोरबा में पहली बार चक्काजाम, पसान में परेशान ग्रामीण उतरे सड़क पर, वन विभाग के लिखित आश्वासन पर माने

डेढ़ महीने से पसान क्षेत्र में डेरा जमाए हाथियों का दल, फसल मुआवजा, झटका तार और स्ट्रीट लाइट समेत 9 मांगों को लेकर सड़क पर उतरे ग्रामीण
कोरबा/पसान। कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत पसान क्षेत्र में पिछले डेढ़ महीने से दर्जनों हाथियों का दल डेरा जमाए हुए है। हाथियों की लगातार मौजूदगी और किसानों की फसलों को हो रहे नुकसान से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा आज सड़क पर उतर आया। हाथियों की समस्या के स्थायी समाधान, फसल नुकसान के मुआवजे और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग को लेकर पसान की पूर्व सरपंच विनीता देवी और महिला नेत्री सरोज अग्रवाल अवतार सिंह पटेल सिंह अन्नू कृष्णा यादव सुरेश अगरिया बाबूलाल के नेतृत्व में ग्रामीणों ने पसान बस स्टैंड पर चक्काजाम कर दिया। करीब तीन घंटे तक चले चक्काजाम से पेंड्रा-कटघोरा मुख्य मार्ग पर आवागमन प्रभावित रहा। अंततः एसडीएम की समझाइश और वन परिक्षेत्र अधिकारी, पसान की ओर से लिखित जवाब मिलने के बाद ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त किया।

डेढ़ महीने से हाथियों की मौजूदगी, किसानों की बढ़ी चिंता
ग्रामीणों के अनुसार, पिछले करीब डेढ़ महीने से दर्जनों हाथियों का दल पसान क्षेत्र में मौजूद है। हाथियों के झुंड खेतों में पहुंचकर धान की फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे किसानों की मेहनत पर पानी फिरने के साथ उनकी आजीविका पर भी संकट खड़ा हो गया है। हाथियों की आवाजाही के कारण ग्रामीणों को अपने घरों, खेतों और परिवार की सुरक्षा की चिंता सता रही है। कई ग्रामीणों को रातभर जागकर खेतों और आसपास के क्षेत्रों की निगरानी करनी पड़ रही है।

समस्या के समाधान की मांग को लेकर ग्रामीणों ने 12 अक्टूबर को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), पोड़ी उपरोड़ा को मांग पत्र सौंपा था। मांगों पर प्रभावी कार्रवाई की मांग करते हुए गुरुवार सुबह ग्रामीण पसान बस स्टैंड पर एकत्र हुए और चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शन के कारण पेंड्रा-कटघोरा मुख्य मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।
स्ट्रीट लाइट, झटका तार और मुआवजा समेत 9 मांगें
पूर्व सरपंच विनीता देवी और महिला नेत्री सरोज अग्रवाल के नेतृत्व में ग्रामीणों ने हाथियों से प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने और किसानों को हुए नुकसान की भरपाई करने की मांग उठाई। ग्रामीणों के मांग पत्र में नौ बिंदुओं पर कार्रवाई की मांग की गई।
इनमें प्रत्येक मोहल्ले और पारे में स्ट्रीट लाइट लगाने, हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखने के लिए झटका तार की व्यवस्था करने, बेजा कब्जे वाली भूमि पर फसल लगाने वाले प्रभावित किसानों को मुआवजा देने तथा फसल नुकसान होने पर आठ दिन के भीतर मुआवजा भुगतान करने की मांग शामिल है।
इसके अलावा, प्रत्येक मोहल्ले में हाथी टीम की उपस्थिति सुनिश्चित करने, एक एकड़ में 15 क्विंटल धान अथवा उसके समतुल्य राशि के आधार पर मुआवजा देने, ग्राम पंचायत द्वारा पहले लगाई गई स्ट्रीट लाइट की मरम्मत कराने और पिछले वर्ष के लंबित मुआवजा प्रकरणों का भुगतान करने की मांग भी रखी गई।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों की समस्या से निपटने के लिए केवल अस्थायी व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। प्रभावित गांवों में सुरक्षा, निगरानी और मुआवजे की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने की जरूरत है, ताकि किसानों और ग्रामीणों को लगातार हो रही परेशानी से राहत मिल सके।

एसडीएम की समझाइश, वन विभाग ने दिया लिखित आश्वासन
चक्काजाम की सूचना पर मौके पर पहुंचे एसडीएम ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और उन्हें समझाइश दी। इसके बाद वन परिक्षेत्र अधिकारी, पसान की ओर से ग्रामीणों के मांग पत्र के बिंदुओं पर लिखित आश्वासन दिया गया।
लिखित आश्वासन में बताया गया कि मांग पत्र के बिंदु क्रमांक 1, 2, 3 और 6 से संबंधित प्रस्ताव उच्च कार्यालय को भेजे जा रहे हैं। बजट प्राप्त होने के बाद स्ट्रीट लाइट और झटका तार की व्यवस्था की जाएगी। वहीं, बिंदु क्रमांक 4 और 5 पर तत्काल कार्रवाई किए जाने की बात कही गई। जवाब में यह भी उल्लेख किया गया कि वर्तमान में प्रत्येक मोहल्ले में हाथी मित्र उपस्थित हैं।

पिछले वर्ष के लंबित मुआवजा प्रकरणों की जांच कर तत्काल कार्रवाई करने की बात भी लिखित जवाब में कही गई है। इसके साथ ही ग्राम पंचायत द्वारा लगाई गई सोलर स्ट्रीट लाइट की मरम्मत के लिए संबंधित विभाग को तत्काल सूचित करने का उल्लेख किया गया है।
लिखित आश्वासन के बाद खत्म हुआ चक्काजाम
एसडीएम की समझाइश और वन विभाग की ओर से लिखित जवाब मिलने के बाद ग्रामीणों ने करीब तीन घंटे से जारी चक्काजाम समाप्त कर दिया। इसके बाद मुख्य मार्ग पर आवागमन बहाल होने का रास्ता साफ हुआ।
हालांकि, चक्काजाम समाप्त होने के बाद भी ग्रामीणों की समस्याओं का स्थायी समाधान अहम सवाल बना हुआ है। हाथियों की लगातार मौजूदगी से प्रभावित किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा, गांवों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और जरूरी सुविधाएं कब तक मिलेंगी, इस पर सबकी नजर है।
ग्रामीणों को उम्मीद है कि लिखित जवाब में किए गए उल्लेख के अनुसार प्रशासन और वन विभाग जल्द प्रभावी कदम उठाएंगे। अब देखना होगा कि प्रस्तावों, मुआवजा प्रकरणों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आगे कितनी तेजी से कार्रवाई होती है।



