अहिरन नदी में लाल रंग का गंदा पानी बहने से हड़कंप! कटघोरा से डूडगा और धवईपुर तक ग्रामीण चिंतित, जल प्रदूषण की जांच जरूरी
कटघोरा। जीवनदायिनी अहिरन नदी में लाल रंग का गंदा पानी पहुंचने से नदी की स्वच्छता और जल गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है। कटघोरा नगर पालिका परिषद के नाले के माध्यम से बेहद गंदा पानी नदी में छोड़ा जा रहा है। नदी में बहते पानी का रंग लाल दिखाई दे रहा है, जिसे देखकर डूडगा और धवईपुर क्षेत्र के ग्रामीणों में डर और चिंता का माहौल है। ग्रामीणों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर नदी में लाल रंग का पानी कहां से आ रहा है और यह उनके स्वास्थ्य तथा पर्यावरण के लिए कितना सुरक्षित है।

नाले से नदी तक पहुंच रहा लाल रंग का पानी, उठ रहे सवाल
कटघोरा नगर पालिका परिषद के नाले से नदी में पहुंच रहे गंदे पानी की स्थिति ने जल प्रदूषण को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। नदी में लाल रंग का पानी दिखाई देना चिंता का विषय है। हालांकि, पानी का रंग लाल होने के पीछे क्या कारण है और उसमें किस तरह के प्रदूषक मौजूद हैं, इसकी पुष्टि प्रयोगशाला में जांच के बाद ही हो सकती है।
अहिरन नदी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण जल स्रोत है। नदी के पानी और आसपास के प्राकृतिक पर्यावरण पर प्रदूषण का संभावित असर ग्रामीणों की चिंता बढ़ा रहा है। डूडगा से लेकर धवईपुर तक नदी के पानी की वास्तविक स्थिति का पता लगाना और उसकी गुणवत्ता की जांच कराना आवश्यक है।

डूडगा और धवईपुर के ग्रामीणों की चिंता, पानी की सुरक्षा पर सवाल
नदी में लाल रंग का गंदा पानी देखकर ग्रामीण चिंतित हैं। उनकी चिंता है कि यदि पानी में हानिकारक तत्व मौजूद हैं, तो इसका असर मनुष्यों, मवेशियों और जलीय जीवों पर पड़ सकता है। ऐसे में नदी के पानी की जांच किए बिना उसकी गुणवत्ता को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि नदी में पहुंच रहे पानी का स्रोत क्या है, उसमें लाल रंग किस वजह से दिखाई दे रहा है और क्या इस पानी का उपयोग करना सुरक्षित है?
प्रशासन और पर्यावरण विभाग से जांच की अपेक्षा
इस मामले में जिला प्रशासन, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल और नगर पालिका परिषद कटघोरा को मौके का निरीक्षण कर नाले तथा नदी के पानी के नमूने प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजने चाहिए। जांच के माध्यम से पानी में मौजूद संभावित प्रदूषकों और लाल रंग के कारण का पता लगाया जा सकता है।
यदि जांच में निर्धारित मानकों से अधिक प्रदूषण पाया जाता है, तो उसके स्रोत की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, नाले से नदी में पहुंचने वाले पानी के उचित उपचार और प्रदूषण रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है।
नदी को प्रदूषण से बचाना जरूरी, जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
अहिरन नदी में पहुंच रहे लाल रंग के गंदे पानी की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को जल्द कदम उठाने की जरूरत है। पानी की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने से डूडगा, धवईपुर और आसपास के ग्रामीणों को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सकेगी।
जब तक पानी की गुणवत्ता की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक ग्रामीणों को नदी के संदिग्ध पानी का पीने और खाना बनाने जैसे कार्यों में उपयोग करने से बचना चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अहिरन नदी में लाल रंग का गंदा पानी आखिर किस वजह से पहुंच रहा है? इसका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। नदी को स्वच्छ रखना, जल प्रदूषण पर नियंत्रण करना और ग्रामीणों के स्वास्थ्य तथा पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की प्राथमिकता होनी चाहिए।


