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बिजली दरों में बेतहाशा वृद्धि और बदहाल व्यवस्था के खिलाफ कांग्रेस का हल्लाबोल, सरकार पर जनविरोधी फैसले का आरोप

कोरबा। प्रदेश में बिजली दरों में की गई बेतहाशा वृद्धि और बदहाल बिजली व्यवस्था के मुद्दे को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ने कोरबा प्रेस क्लब के तिलक भवन में प्रेस वार्ता कर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश की जनता, मीडिया प्रतिनिधियों और बिजली उपभोक्ताओं का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि बिजली दरों में की गई वृद्धि पूरी तरह अनुचित है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि आम नागरिक की आर्थिक स्थिति से जुड़ा गंभीर विषय है। पार्टी के अनुसार यह निर्णय जनविरोधी, किसान-विरोधी और मध्यम वर्ग-विरोधी है तथा इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।

प्रेस वार्ता में पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने सीधे आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने एक बार फिर घरेलू एवं व्यावसायिक बिजली दरों में वृद्धि कर जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया है। नई दरें 1 जुलाई से लागू होंगी, जिसका सीधा असर जुलाई के बिजली बिलों में दिखाई देगा। पहले से महंगाई की मार झेल रहे परिवारों के लिए यह निर्णय अत्यंत कष्टदायक साबित होगा। कांग्रेस ने कहा कि सरकार जनता की आय बढ़ाने में विफल रही है, लेकिन लगातार खर्च बढ़ा रही है।
कांग्रेस ने अपनी सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि पांच वर्षों में 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली योजना लागू कर लाखों परिवारों को राहत दी गई थी। वहीं भाजपा सरकार ने इस लाभ को सीमित कर दिया है और अब केवल सीमित उपभोक्ताओं को ही इसका फायदा मिल पा रहा है।
महंगाई और बिजली दर वृद्धि के संबंध पर कांग्रेस ने कहा कि गैस सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पहले ही भारी वृद्धि हो चुकी है, जिससे परिवहन लागत बढ़ी है और आवश्यक वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं। अब बिजली दरों में वृद्धि से उद्योग, व्यापार और सेवा क्षेत्र की लागत और बढ़ेगी, जिसका असर दूध, सब्जी, किराना, छोटे उद्योग, होटल और दुकानों सहित अन्य सेवाओं पर पड़ेगा। अंततः आम जनता को हर वस्तु महंगी खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
कोरबा एवं प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने कहा कि ‘ऊर्जा राजधानी’ कहे जाने वाले कोरबा में भी अघोषित बिजली कटौती हो रही है। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में लो-वोल्टेज और हाई-वोल्टेज की समस्या बनी हुई है। कई स्थानों पर ट्रांसफार्मर खराब होने पर कई दिनों तक बिजली आपूर्ति बाधित रहती है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं से अधिक शुल्क वसूला जा रहा है। कांग्रेस ने सवाल किया कि जब सेवा में कोई सुधार नहीं हुआ, तो दर वृद्धि का औचित्य क्या है।
महतारी वंदन योजना को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर महिलाओं को ₹1000 प्रति माह देने का प्रचार किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बिजली, गैस, डीजल और पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि कर परिवारों पर उससे कहीं अधिक आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। कांग्रेस ने सरकार से जवाब मांगा कि राहत से अधिक राशि महंगाई के माध्यम से क्यों वसूली जा रही है।
इस दौरान कांग्रेस ने सरकार से कई सीधे प्रश्न भी किए, जिनमें बिजली दर वृद्धि की आवश्यकता, बिजली उत्पादक राज्य में महंगी बिजली, उपभोक्ताओं को बेहतर और निर्बाध सेवा, कटौती एवं वोल्टेज समस्या का स्थायी समाधान और गरीब, किसान व मध्यम वर्ग को राहत देने की योजना जैसे मुद्दे शामिल हैं।
कांग्रेस ने मांग की कि बिजली दरों में की गई वृद्धि को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। साथ ही घरेलू उपभोक्ताओं को विशेष सब्सिडी, किसानों को सस्ती एवं निर्बाध बिजली, अघोषित कटौती पर रोक, वोल्टेज समस्या के समाधान के लिए विशेष अभियान और बिजली वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए समयबद्ध कार्ययोजना जारी की जाए।
अंत में कांग्रेस ने संकल्प जताया कि वह जनता के हितों की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ेगी। पार्टी ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं और आम जनता के हित में है। जब तक बिजली दर वृद्धि का निर्णय वापस नहीं लिया जाता, कांग्रेस का संघर्ष जारी रहेगा। प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस कमेटी के शहर अध्यक्ष मुकेश राठौर, ग्रामीण अध्यक्ष मनोज चौहान, पूर्व विधायक मोहितलाल केरकेट्‌टा, पूर्व विधायक श्यामलाल कंवर, नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष कृपाराम साहू, हरीश परसाई, सपना चौहान समेत अन्य कांग्रेसी नेता मौजूद थे।

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