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कोरबा ब्रेकिंग : सीईओ के इंतजार में तीन घंटे तक बैठे रहे जनप्रतिनिधि, नाराज जिला पंचायत अध्यक्ष ने खोला मोर्चा नारेबाजी भी की

कोरबा। जिला पंचायत सीईओ दिनेश कुमार नाग की कार्यप्रणाली और डीएमएफ फंड के उपयोग को लेकर सोमवार को जिला पंचायत परिसर में भारी हंगामा देखने को मिला। भाजपा समर्थित जिला पंचायत अध्यक्ष पवन सिंह, कई सदस्य और उनके परिजन कार्यालय परिसर में ही धरने पर बैठ गए, जिससे पूरे परिसर में हलचल मच गई।

धरने पर बैठे जनप्रतिनिधियों ने सीईओ पर मनमानी, जनप्रतिनिधियों की अनदेखी और कथित कमीशनखोरी जैसे गंभीर आरोप लगाए। अध्यक्ष पवन सिंह ने नाराजगी जताते हुए कहा कि “सीईओ क्या करते हैं, इसकी रिकॉर्डिंग हमारे पास है। ऐसे अधिकारी सरकार की छवि खराब कर रहे हैं। 20-25 वर्षों के अनुभव में मैंने 16 सीईओ देखे हैं, लेकिन इनके जैसा रवैया पहले कभी नहीं देखा।”
उन्होंने आरोप लगाया कि सामान्य सभा को दरकिनार कर एकतरफा निर्णय लिए जा रहे हैं और जनप्रतिनिधियों को तवज्जो नहीं दी जा रही है। अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ तो एक महीने बाद, को जिला पंचायत में ताला जड़ दिया जाएगा।
तीन घंटे इंतजार के बाद भी नहीं पहुंचे सीईओ
अध्यक्ष के अनुसार, सीईओ दिनेश कुमार नाग को बैठक में आमंत्रित किया गया था, जहां विकास कार्यों और योजनाओं पर चर्चा होनी थी। लेकिन करीब तीन घंटे इंतजार के बावजूद उनके नहीं पहुंचने से सदस्य नाराज हो गए और धरने पर बैठ गए।
इस दौरान जब सीईओ अपने चैंबर से निकलकर जाने लगे तो सदस्यों ने उन्हें रोककर बात करने की कोशिश की, लेकिन “अभी समय नहीं है” कहकर वे वहां से चले गए। इसके बाद सदस्यों ने जमकर नारेबाजी की।
डीएमएफ फंड में पारदर्शिता पर सवाल
जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि डीएमएफ (जिला खनिज संस्थान न्यास) की राशि के उपयोग में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। योजनाओं के चयन और स्वीकृति प्रक्रिया में निर्वाचित प्रतिनिधियों की राय को नजरअंदाज किया जा रहा है।
कई सदस्यों ने कहा कि अधिकारियों की मनमानी के कारण उनकी भूमिका सिर्फ औपचारिक रह गई है। साथ ही, विकास कार्यों में कथित कमीशनखोरी की भी बात उठाई गई और निष्पक्ष जांच की मांग की गई।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
धरने के दौरान जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया और कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि स्थिति नहीं सुधरी तो सभी सदस्य इस्तीफा देने के लिए मजबूर होंगे।
जिला पंचायत परिसर में देर तक गहमागहमी का माहौल बना रहा और इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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