जंगल-पहाड़ों के बीच विकास की राह, अब गांव तक पहुँच रही एम्बुलेंस और सुविधाएं

कोरबा।कोरबा विकासखंड के दूरस्थ पहाड़ी और वनांचल क्षेत्रों में बसे जामभाठा, सोनारी और आसपास के पारा-टोले अब विकास की मुख्यधारा से जुड़ने लगे हैं। वर्षों से यहां निवास कर रहे विशेष पिछड़ी जनजाति—पहाड़ी कोरवा और पंडो परिवारों को अब पक्की सड़क की सुविधा मिल गई है, जिससे उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है।
पहले इन गांवों तक पहुँचने के लिए केवल कच्चे, पथरीले और ऊबड़-खाबड़ रास्ते ही सहारा थे। खासकर बारिश के दिनों में हालात बेहद खराब हो जाते थे। कीचड़ और फिसलन के कारण आवागमन लगभग ठप हो जाता था। बीमारों को अस्पताल ले जाना, राशन लाना या बच्चों को स्कूल भेजना—हर काम चुनौतीपूर्ण था।
पीएम जनमन योजना के अंतर्गत मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में लगभग 3.60 किलोमीटर लंबी पक्की सड़क का निर्माण कराया गया। पहाड़ी और कठिन भू-भाग में सड़क बनाना आसान नहीं था, लेकिन प्रशासन के प्रयासों से यह कार्य सफलतापूर्वक पूरा हुआ।
सड़क बनने के बाद अब गांव तक चारपहिया वाहन और एम्बुलेंस आसानी से पहुँचने लगी है। ग्रामीण पन साय बताते हैं कि पहले बारिश के समय बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाना बेहद कठिन था, लेकिन अब स्थिति काफी बेहतर हो गई है।
वहीं, कुमारी बाई का कहना है कि सड़क बनने से गांव का संपर्क बाहरी दुनिया से जुड़ गया है। अब शिक्षक भी नियमित रूप से स्कूल पहुँच पा रहे हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई में सुधार हुआ है।
हाल ही में कलेक्टर कुणाल दुदावत ने भी गांव पहुँचकर सड़क का निरीक्षण किया, जिससे ग्रामीणों का प्रशासन पर भरोसा और मजबूत हुआ है।
जामभाठा और सोनारी की यह सड़क अब सिर्फ एक मार्ग नहीं, बल्कि ग्रामीणों के लिए नए जीवन, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और शिक्षा की ओर बढ़ता हुआ मजबूत कदम बन गई है।


