कोरबा ढपढप में हनुमंत कथा का भव्य आगाज: बागेश्वर सरकार का जोरदार स्वागत
कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के बांकी मोंगरा अंतर्गत ग्राम ढपढप में आज से पांच दिवसीय श्री हनुमंत कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। कथा का श्रवण कराने बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के कोरबा पहुंचते ही श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। कथा मंच पर पहुंचते ही उन्होंने हजारों भक्तों का अभिवादन स्वीकार किया।
कथा प्रारंभ से पहले अपना घर सेवा आश्रम के बच्चों और महिलाओं ने कथा व्यास एवं भगवान हनुमान की आरती उतारी। इस दौरान पंडित शास्त्री ने छत्तीसगढ़ और कोरबा की जमकर प्रशंसा करते हुए कहा कि “अगर कोरबा का कोयला न हो, तो मध्य प्रदेश में बिजली तक न रहे।” उन्होंने छत्तीसगढ़ महतारी और माता सर्वमंगला को नमन करते हुए आत्मीयता जताई।
इस मौके पर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने राणा मुखर्जी और उनकी पत्नी द्वारा संचालित अपना घर सेवा आश्रम के सेवा कार्यों की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि जो लोग बेसहारा हैं, उनके लिए सहारा बनना सबसे बड़ा पुण्य है और इस कार्य में यह दंपति मिसाल है।

घर वापसी के लिए खुला आमंत्रण
पंडित शास्त्री ने बताया कि वे 1 अप्रैल तक कोरबा में रहेंगे, जहां कथा के साथ दिव्य दरबार भी लगाया जाएगा। उन्होंने कोरबा, रायगढ़, जशपुर और बिलासपुर के लोगों से अपील करते हुए कहा कि जो भी “घर वापसी” करना चाहते हैं, उनके दरबार में स्वागत है। साथ ही उन्होंने कहा कि सुंदरकांड का पाठ देश की दिशा और दशा बदलने की शक्ति रखता है।

‘छुरी’ नाम पर हास-परिहास
कथा के दौरान उन्होंने हास्य अंदाज में ग्राम छुरी का जिक्र करते हुए कहा कि नाम सुनकर एक बार डर गए थे और मजाक में बोले—“अभी हमारी शादी भी नहीं हुई और छुरी आ गए।” इस पर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु ठहाकों से गूंज उठे।

जिंदल एयरपोर्ट पर हुआ भव्य स्वागत
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री शनिवार दोपहर 1:45 बजे रायगढ़ जिले के जिंदल एयरपोर्ट पर प्राइवेट जेट से पहुंचे। यहां आयोजकों और श्रद्धालुओं ने फूल-मालाओं और जय श्रीराम के जयघोष के साथ उनका भव्य स्वागत किया। इसके बाद उनका काफिला रायगढ़ से कोरबा के लिए रवाना हुआ और शाम करीब 4 बजे कथा स्थल ढपढप पहुंचा।
कथा स्थल पर हजारों श्रद्धालु उनके आगमन की प्रतीक्षा में पलक-पांवड़े बिछाए बैठे रहे। पूरे क्षेत्र में भक्ति, आस्था और उत्साह का माहौल देखने को मिला।


