हवा-हवाई प्लानिंग बनाकर डीएमएफ से करोड़ों खर्च, अब नई सरकार से उद्धर का इंतजार
शहर में विकास कार्य के नाम से बने मल्टीलेवल पार्किंग, चौपाटी, कल्चरल भवन, उपयोग के अभाव में बनते जा रहे नशेड़ियों के अड्डे

कोरबा। प्रदेश में नई सरकार आने के बाद से डीएमएफ को लेकर चर्चा चल रही है। बुधवार को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने डीएमएफ से स्वीकृति के बाद भी ऐसे कार्य जो प्रारंभ नहीं हुए हैं उनपर रोक लगाने निर्देश जारी किया है। लेकिन कोरबा में एक दशक के दौरान हवा-हवाई प्लानिंग के साथ विकास कार्य के नाम से डीएमएफ से अनेक कार्य कराए गए हैं। निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद करोड़ों के भवन या अन्य स्थल अब भगवान भरोसे या कहा जाएं तो लावारिस पड़े हैं। जिसमें शहर के सुनालिया चौक के पास बना मल्टीलेवल पार्किंग, घंटाघर मैदान के पास बना चौपाटी, डिंगापुर में बना कल्चरल भवन, बुधवारी बाजार के पास बना एफओबी जैसे कई अन्य कार्य शामिल है। शहर में ऐसे विकास कार्य को आमजन के उपयोग में लाना चुनौती से कम नहीं है क्योंकि पूर्व के कई कलेक्टर निरीक्षण करने व कवायद शुरू करने के बाद भी सफल नहीं हो सके। अब जब सरकार बदली है तो एक बार फिर से शहर विकास के लिए ऐसे कार्यो के उद्धार का इंतजार किया जा रहा है।
15 करोड़ में मल्टीलेवल पार्किंग सफेद हाथी
शहर के पावर हाऊस रोड पर जाम की समस्या दूर करने के लिए 6 साल पहले डीएमएफ से 15 करोड़ रुपए खर्च करके सुनालिया चौक के समीप मल्टीलेवल पार्किंग का निर्माण कराया गया। बनने के बाद से अब तक मल्टीलेवल पार्किंग का उपयोग शुरू नहीं हुआ है। पूर्व के कलेक्टर किरण कौशल व संजीव झा ने सफेद हाथी साबित हो रहे मल्टीलेवल पार्किंग का निरीक्षण करके उपयोग के लिए दूसरी योजना तैयार करने की बात कही थी लेकिन कवायद आगे नहीं बढ़ी। अब मल्टीलेवल पार्किग शराबियों व जुआरियों के काम आ रहा है।
पौने 4 करोड़ का कल्चरल भवन भगवान भरोसे
जिला मुख्यालय समेत राजस्व कालोनी के करीब डिंगापुर में डीएमएफ के पौने 4 करोड़ की लागत से कल्चरल भवन बनाया गया। भवन बनाने का उदेश्य कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देना था। भवन का निर्माण पूरा होने के बाद हाऊसिंग बोर्ड ने शिक्षा विभाग के हैंडओवर कर दिया। कोविड काल के दौरान भवन का उपयोग नहीं हुआ। अब सभी विभाग भवन को अपने हैंडओवर में होने से इंकार कर रहे हैं। वहीं भवन भगवान भरोसे पड़ा है। अंदर लगे दरवाजे, उपकरण सभी चोरी हो गए। झाड़ियों के बीच भवन खंडहर होता जा रहा है।
ढाई करोड़ में बनी चौपाटी हो गई चौपट
एक ओर घंटाघर मैदान का एक हिस्सा ठेलों से भर जाने के कारण चौपाटी कहलाता है तो दूसरी ओर घंटाघर से सुभाष चौक के बीच सड़क किनारे बेतरतीब से ठेले00खोमचे लगे नजर आते हैं। जिससे यातायात व्यवस्था भी बाधित होता है। घंटाघर मैदान में आयोजन होने पर परेशानी होती है। इसके लिए नगर निगम ने डीएमएफ से 2.40 करोड़ की लागत से घंटाघर मैदान के पास स्मृति उद्यान के पीछे चौपाटी का नर्माण कराया। जहां शुरूआत में ठेले वाले व्यापारी पहुंचे लेकिन कोविड काल के बाद सभी बाहर आकर दुकान लगाने लगे। तब से चौपाटी का हाल चौपट हो गया है। वहां नशेड़ियों व असामाजिक तत्वों की मौजूदगी रहती है। उपकरण व लाइट चोरी हो गए, बच्चों के लगे झूले जंग खा रहे हैं।
बुधवारी में 78 लाख का एफओबी हुआ बेकार
शहर के प्रमुख साप्ताहिक बाजार बुधवारी है। हालांकि कोविड काल के बाद साप्ताहिक के बजाए बुधवारी डेली मार्केट बन गया है। ज्यादातर शहरवासी बुधवारी बाजार से खरीदी करते हैं। इस कारण बाजार के एक ओर वीआईपी रोड तो दूसरी ओर घंटाघर रोड पर सड़क पर बेतरतीब वाहनों की पार्किंग होती है। सड़क पर आवाजाही में परेशानी होती है। व्यवस्था को बदलने नगर निगम ने बुधवारी काम्पलेक्स के पीछे वाहनों की पार्किंग तय की। साथ ही वहां से बिना सड़क पार किए बाजार पहुंचने के लिए डीएमएफ से 78 लाख रुपए की लागत से एफओबी बनवाया गया। कई साल बाद भी एफओबी बेकार साबित हुआ। अब वहां नशेड़ियों की अड्डेबाजी चलती है।