8 करोड़ का बाल संप्रेक्षण गृह, फिर भी सुरक्षा में सेंध; 14 माह में 4 बार फरार हुए अपचारी बालक
कोहड़िया में करोड़ों की लागत से बने भवन में अगस्त 2025 में हुई थी शिफ्टिंग, रोशनदान से लेकर चैनल गेट तक सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
कोरबा। जिले के कोहड़िया स्थित बाल संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। करीब 8 करोड़ रुपए की लागत से तैयार भवन में अपचारी बालकों के फरार होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार सुबह चोरी के मामले में करीब 20 दिन पहले बाल संप्रेक्षण गृह में लाया गया एक अपचारी बालक कर्मचारियों को चकमा देकर चैनल गेट खोलकर फरार हो गया। सुबह बालकों की गिनती के दौरान उसके गायब होने का पता चला, जिसके बाद गृह में हड़कंप मच गया।
अधिकारियों और कर्मचारियों ने आसपास के क्षेत्रों में उसकी तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। इसके बाद सीएसईबी चौकी पुलिस को घटना की सूचना दी गई। पुलिस ने फरार बालक की तलाश शुरू कर दी है और उसके नाते-रिश्तेदारों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।
यह घटना ऐसे समय हुई है, जब प्रदेश के दूसरे जिलों के बाल संप्रेक्षण गृहों से भी अपचारी बालकों के फरार होने की गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं। बिलासपुर के नूतन चौक स्थित बाल संप्रेक्षण गृह में जुलाई 2026 में चौकीदार की हत्या कर चार बालक फरार हो गए थे। वहीं, हाल ही में अंबिकापुर के बाल संप्रेक्षण गृह में भोजन के दौरान रसोइये पर गर्म खाना फेंकने और ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा गार्ड को कमरे में बंद करने के बाद 13 नाबालिगों के फरार होने की घटना सामने आई थी। इन घटनाओं के बावजूद कोरबा के बाल संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है।
एक दशक बाद मिला अपना भवन, फिर भी नहीं थम रहा फरारी का सिलसिला
कोरबा में बाल संप्रेक्षण गृह की स्वीकृति करीब एक दशक पहले मिली थी। सरकारी भवन उपलब्ध नहीं होने के कारण रिस्दी के पास निजी भवन में किराए पर इसका संचालन किया जा रहा था। जगह की कमी के चलते वहां अपचारी बालकों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही थीं। इस दौरान बालकों के फरार होने की घटनाएं भी सामने आती रहीं।
इसके बाद करीब आठ साल पहले कोहड़िया में जिला खनिज न्यास मद (डीएमएफ) से लगभग 8 करोड़ रुपए की लागत से बाल संप्रेक्षण गृह परिसर का निर्माण कराया गया। भवन और परिसर वर्ष 2021 में बनकर तैयार हो गए थे, लेकिन एप्रोच रोड की समस्या के कारण करीब चार साल तक इनका उपयोग नहीं हो सका। इस दौरान भवन के दरवाजे, खिड़कियों समेत कई कीमती सामान की चोरी हो गई।
बाद में प्रशासन ने भवन का दोबारा उन्नयन कराया और अगस्त 2025 में बाल संप्रेक्षण गृह को नए परिसर में शिफ्ट किया गया। उम्मीद थी कि नए भवन में बेहतर सुविधाओं के साथ सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी, लेकिन यहां भी फरारी की घटनाएं सामने आने लगीं।
मंत्री और अधिकारियों के दौरे के बाद भी सुरक्षा पर सवाल
बाल संप्रेक्षण गृह में सुरक्षा के लिए प्रत्येक शिफ्ट में दो गार्ड तैनात रहने की व्यवस्था है। परिसर में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। इसके बावजूद कभी बाथरूम के रोशनदान, कभी खिड़की और अब चैनल गेट के रास्ते अपचारी बालकों के फरार होने की घटनाएं सामने आई हैं।
लगातार हो रही इन घटनाओं से सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों की निगरानी और परिसर की संरचनात्मक मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े सहित प्रशासनिक अधिकारियों के निरीक्षण और पूर्व की घटनाओं के बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखना चिंता का विषय है। पूर्व में हुई फरारी की घटनाओं की जांच के परिणाम और उन पर की गई कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
एक साल के भीतर सामने आईं फरारी की तीन घटनाएं
केस-1 : अगस्त 2025
कोहड़िया स्थित नए भवन में बाल संप्रेक्षण गृह की शिफ्टिंग के महज दो दिन बाद जांजगीर जिले के चार अपचारी बालक बाथरूम का रोशनदान तोड़कर फरार हो गए थे।
केस-2 : दिसंबर 2025
रसोईघर में चल रहे निर्माण कार्य और कर्मचारियों की कथित लापरवाही का फायदा उठाकर तीन अपचारी बालक फरार हो गए थे। इनमें से एक वापस लौट आया, जबकि दो फरार रहे।
केस-3 : जनवरी 2026
बाल संप्रेक्षण गृह की खिड़की तोड़कर एक अपचारी बालक फरार हो गया था। इस घटना के बाद रोशनदान और खिड़कियों की मजबूती तथा सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे।
अब शनिवार को चैनल गेट खोलकर एक और अपचारी बालक के फरार होने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को फिर उजागर कर दिया है। करोड़ों रुपए खर्च कर तैयार किए गए भवन में बार-बार ऐसी घटनाएं होना प्रशासन के सामने गंभीर चुनौती है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।


