पोड़ी-उपरोड़ा क्षेत्र में प्रस्तावित कोयला खदान का आदिवासी महापंचायत ने किया विरोध, एक दिवसीय जन आंदोलन में गोंगपा विधायक बोले: जमीन देने का फैसला ग्रामीण करेंगे

पोड़ी-उपरोड़ा।पोंड़ी उपरोड़ा विकासखंड में ग्राम पंचायत पुटीपखना, सेन्हा, जल्के एवं तनेरा में प्रस्तावित कोयला खदान के विरोध में ग्रामीणों का आंदोलन तेज हो गया है। शुक्रवार को गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ब्लॉक इकाई पोंड़ी उपरोड़ा एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के नेतृत्व में एक दिवसीय जन आंदोलन सह आदिवासी महापंचायत का आयोजन किया गया।

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) के विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम के नेतृत्व में आयोजित उक्त आंदोलन में बड़ी संख्या में आदिवासी ग्रामीण शामिल हुए। आंदोलन का मुख्य उद्देश्य वन अधिकार पट्टों की मांग और नए कोयला खदान विस्तार का विरोध रहा। विधायक मरकाम ने आरोप लगाया कि चार प्रभावित ग्राम पंचायतों के सरपंचों व सचिवों पर दबाव बनाकर जबरन सहमति प्रस्ताव लिए जा रहे हैं, ताकि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जा सके।

विधायक ने कहा कि क्षेत्र में पहले से संचालित रानी अटारी और विजय बेस्ट कोयला खदानों से पर्यावरण, जल-जंगल और स्थानीय आजीविका को भारी नुकसान हुआ है। ऐसे में एक और खदान खुलने से आदिवासी समाज के अस्तित्व पर संकट गहराएगा।

उन्होंने चेतावनी दी कि जो ग्राम पंचायतें खदान के पक्ष में प्रस्ताव पारित करेंगी, उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। उन्होंने इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा,“हमारी जमीन, हमारा कोयला—इस पर फैसला सिर्फ ग्रामीण करेंगे।”

298 हेक्टेयर भूमि और 13 गांव होंगे प्रभावित
जनपद सदस्य संतोषी मरावी ने बताया कि प्रस्तावित खदान से 298 हेक्टेयर भूमि, 6 ग्राम पंचायतें और 13 गांव प्रभावित होंगे। क्षेत्र के लोग वर्षों से भूमि पर काबिज हैं, लेकिन अब तक उन्हें वन अधिकार अधिनियम के तहत पट्टा नहीं मिला है।

ग्रामीणों ने बताया कि पहले से चल रही खदानों के बावजूद आज तक सड़क, पानी, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, जिससे असंतोष बढ़ता जा रहा है।

ज्ञापन सौंपा गया, पुलिस रही मौजूद
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि आंदोलन के दौरान खदान विस्तार और वन पट्टा मांग को लेकर ग्रामीणों द्वारा सौंपा गया ज्ञापन उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा। आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल मौके पर तैनात रहा। आंदोलन शांतिपूर्ण रहा।
