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डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल खरमोरा कोरबा में बाल दिवस का समारोह बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

कोरबा। आज समारोह का शुभारंभ प्राचार्य हेमंतो मुखर्जी तथा शिक्षकों द्वारा दीप प्रज्वलन तथा पंडित जवाहरलाल नेहरू के चित्र पर माल्यार्पण करके किया गया।आज विद्यालय की प्रार्थना सभा शिक्षकों के द्वारा की गई। जिसमें पंडित नेहरू से जुड़े प्रश्नोंत्तर किए गए। इसके साथ ही शिक्षकों द्वारा पंडित नेहरू के विचार भी व्यक्त किए गए। इस आनंद मेले में कक्षा तीसरी से लेकर कक्षा बारहवीं तक के छात्रों ने विभिन्न प्रकार की वस्तुओं के स्टाल लगाए। जिसमें समोसे ,मैगी, चाउमिन, पास्ता, गुपचुप,कपकेक ब्राउनी,भेल, कॉफी, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक, फ्रेंच फ्राइज़ इत्यादि के स्टॉल लगाए गए। इसके साथ ही विभिन्न प्रकार के रीयल मनी गेम्स छात्रों द्वारा आयोजित किए गए और जीतने वाले को जीत की राशि दी गई। छात्रों ने इस आनंद मेले का खूब आनंद उठाया। इस आनंद मेले में छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों ने भी खूब आनंद उठाया। प्रत्येक कक्षा शिक्षकों ने अपने छात्रों को पेन, पेन्सिल, केक तथा चॉकलेट उपहार स्वरूप दिए।
अंत में प्राचार्य मुखर्जी ने शिक्षकों तथा छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि पंडित नेहरू का मानना था कि कोई भी राष्ट्र तब तक पूरी तरह विकसित नहीं हो सकता जब तक उस देश के बच्चे अविकसित, अपने अधिकारों से वंचित और कमजोर हों। देश की भावी सफलता और समृद्धि बच्चों की सफलता एवं समृद्धि पर निर्भर करती है। पंडित नेहरू को बच्चों से विशेष प्रेम तथा स्नेह था। यही कारण है कि वे बच्चों के चाचा बन गए और बच्चे उनके दोस्त। पंडित नेहरू बच्चों को देश का भविष्य मानते थे इसलिए 27 मई सन 1964 को पंडित नेहरू की मृत्यु के बाद 14 नवंबर को राष्ट्रीय बाल दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। चाचा नेहरू हमेशा कहते थे कि बच्चों को खेलने और पढ़ने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। बच्चे खूब मन लगाकर पढ़ाई करें। अपनी किताबों से दोस्ती करें क्योंकि ज्ञान ही आपके जीवन में सफलता दिला सकता है। बच्चे अच्छे इंसान बने हमेशा ईमानदार रहें, सच बोलें और अपने माता-पिता शिक्षकों तथा बड़ों का आदर व सम्मान करें। याद रखें आप सभी में खूब प्रतिभा है। अपनी प्रतिभा को पहचानिए और अपनी शक्ति व ऊर्जा का उपयोग अपने लक्ष्य की सफलता के लिए उपयोगी बनाएं। यह देश आप पर विश्वास करता है।
आईए आज हम सब मिलकर संकल्प लेने कि हम एक बेहतर इंसान बनकर एक बेहतर राष्ट्र तथा भविष्य का निर्माण करेंगे। आप सभी को राष्ट्रीय बाल दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। हिंदी शिक्षिका अशरफ जहां ने अपने बचपन के दिनों को साझा करते हुए कहा कि बचपन में हमारे दादाजी स्वर्गीय शबजान अहमद जो कि पुलिस विभाग में डीआईजी थे। उन्होंने स्वतंत्रता की लड़ाई को बहुत करीब से देखा। इस स्वतंत्रता को प्राप्त करने के लिए लोगों ने जिस प्रकार अपना बलिदान दिया वे उससे भी बहुत प्रभावित हुए। जब भी उनके दादा स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी बातें हमें बताया करते तो मैंने उनकी आंखों में हमेशा नमी देखी थीं और वे अक्सर पढ़ाते समय शकील बदायूनी द्वारा 1961 में फिल्म गंगा जमुना के लिए एक गीत लिखा था, और वह गीत था “इंसाफ की डगर पर बच्चों दिखाओ चल के। यह देश है तुम्हारा नेता तुम्हीं हो कल के”। गुनगुनाया करते थे। यह गीत पंडित नेहरू की विचारधारा को व्याख्यायित करता है। इस समारोह को सफल बनाने में छात्रों, शिक्षकों, दीदी, भैया तथा अभिभावकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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