विश्व एड्स दिवस आज: जिले में 1492 एचआईवी पॉजिटिव, ट्रेसिंग के साथ ही बढ़ रही संक्रमितों की संख्या
50 फीसदी पीड़ित ही ले रहे हैं एआरटी सेंटर से नियमित दवा, अब स्कूल-कॉलेज में कैंप लगाकर किया जाएगा जागरूक

कोरबा। ऊर्जाधानी कोरबा में एड्स तेजी से पांव पसार रहा है। जागरूकता का अभाव, लापरवाही या फिर कोई अन्य वजह लेकिन जिले में हर साल एचआईवी से ग्रसित लोगों की तादाद बढ़ती जा रही है। बचाव के लिए कोई खास इंतजाम नहीं है। जागरूकता अभियान के अलावा जिले में ऐसा कोई कार्यक्रम नहीं किया जा रहा है जिससे इस बीमारी की भयावहता का पता लोगों को चल सके। दरअसल समाज में अब भी सेक्स के संबंध में चर्चा करने से लोग कतराते हैं। इसी वजह से आने वाले नई पीढ़ी जागरूकता के अभाव में गलत राह में जा रही है जिससे एड्स का खतरा बढ़ता जा रहा है। यह हम नहीं बल्कि सरकारी आंकड़े बयां कर रहे हैं। जिले में एड्स नियंत्रण कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2003 से हुई है। 20 साल के दौरान अब तक 2 लाख 17 हजार 595 लोगों की एचआईवी टेस्ट किया जा चुका हैं। जिसमें अब तक 1492 पॉजिटिव मिल चुके हैं। जिसमें 96 गर्भवती भी शामिल है। जबकि 5 वर्ष पहले तक संक्रमितों की संख्या 1 लाख 3 हजार 690 टेस्टिंग पर 831 था। इस साल टेस्टिंग कम होने से पॉजिटिव केस कम मिले हैं लेकिन इससे पहले के वर्षो पर नजर डाले तो साल-दर-साल संक्रमितों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। खास बात यह है कि अब तक मिले एड्स संक्रमितों में करीब 50 फीसदी अर्थात 736 मरीज नियमित दवाई लेने सेंटर पहुंच रहे हैं। बाकी लोकलाज के चक्कर में दवाई लेने नहीं आ रहे हैं, जो चिंताजनक है।
ट्रेसिंग के बाद की जा रही संक्रमितों की काउंसलिंग
जिले में वर्ष 2003 में एड्स नियंत्रण के लिए जिला अस्पताल में आईसीटीसी सेंटर शुरू किया गया। अब जिले के 6 अन्य स्थान पीएचसी कोरबा, सीएचसी कटघोरा, सीएचसी पाली, सीएचसी दीपका, गोढ़ी व सरगबुंदिया में आईसीटीसी सेंटर खोला जा चुका है। बालको में भी आईसीटीसी सेंटर खोलने की तैयारी चल रही है। इन सेंटरों में काउंसलरों द्वारा रक्त के जांच में मिले संक्रमित मरीजों की काउंसलिंग की जाती है। काउंसलरों के प्रयास से तनावग्रस्त मरीजों को जीवन जीने की राह पर बढ़ते हैं। उन्हें नियमित रूप से दवा लेने के लिए तैयार किया जाता है। जिससे बीमारी के फैलावा को रोका जा सके।
देखें इस तरह 10 वर्षो में मिले पॉजिटिव मरीज
2015- 83
2016- 88
2017- 82
2018- 102
2019- 80
2020- 83
2021-111
2022-130
2023-169
2024-79
सुरक्षा ही सर्वोत्तम उपाय, सेक्स शिक्षा जरूरी: नोडल अधिकारी
एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. बीआर रात्रे के मुताबिक ट्रेसिंग बढ़ने से पहले की तुलना में ज्यादा संक्रमित मिल रहे हैं। संक्रमितों को हेय दृष्टि से देखने के बजाए देखभाल की आवश्यकता होती है। बीमारी लाइलाज है, नियमित दवाई लेना जरूरी है। एड्स से बचने के लिए सुरक्षा ही सर्वोत्तम उपाय है। बदलते जमाने के साथ अब बच्चों के किशोर अवस्था में पहुंचते ही सेक्स शिक्षा दिया जाना जरूरी है। जिससे वे एड्स जैसी बीमारी से बच सकें।