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एक साल में कर्जदार से लखपति बना डायरेक्टर तो कैशियर ने बना लिया तीन मंजिला मकान, टीम लीडर भी हो गए मालामाल 

फ्लोरा मैक्स ठगी कांड: ऑनलाइन ठगी करने वाले एप की तरह ही ऑफलाइन स्कीम किया लॉन्च, महिला समूहों को कमाई का लालच देकर किया बड़ा नेटवर्क तैयार 

कोरबा। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का सब्जबाग दिखाकर बैंकों से लोन निकलवाकर ठगी करने वाले फ्लोरा मैक्स के डायरेक्टरों के साथ ही टॉप-10 लीडर व कैशियर ने एक साल के भीतर जमकर कमाई की। अब पुलिस कंपनी के डायरेक्टर समेत अन्य के खिलाफ केस दर्ज कर पुलिस जांच-पड़ताल में जुटी है।

पुलिस की जांच में अब तक ऑन रिकार्ड 27 हजार महिलाओं के फ्लोरा मैक्स से जुड़े होने और उनके रकम निवेश होने का पता चला है। अधिकारियों का कहना है कि आगे दस्तावेजों की जांच में निवेशक महिलाओं की संख्या बढ़ भी सकती है। इधर दैनिक भास्कर ने पड़ताल करते हुए कंपनी के डायरेक्टर, टॉप-10 लीडर व कैशियर की हिस्ट्री खंगाली तो चौकाने वाली जानकारी सामने आई। फ्लोरा मैक्स कंपनी को खड़ी करने वाले अखिलेश के बारे में पता चला कि वह काम छूटने के बाद लोगों से उधार लेकर 3 लाख रुपए का कर्जदार हो गया था। पैदल घूम-घूमकर महिलाओं को बिजनेस का आइडिया बताते हुए वह एक साल में लखपति बन गया। कर्ज भी चूकता कर दिया और कार में घूमने लगा। उसके रहन-सहन में बदलाव आ गया। हालांकि उसने पुराने घर को नहीं छोड़ा और न ही नया बनाया। सबसे ज्यादा चौकाया कंपनी के कैशियर मयाराम की लाइफ स्टाइल ने क्योंकि एक साल के भीतर उसका साधारण मकान तीन मंजिला मकान में तब्दील हो गया। टॉप-10 लीडरों का भी इस दौरान रहन-सहन बदल गया। घर में दोपहिया से लेकर चार पहिया वाहन पहुंच गए। कैशियर के मकान को देखकर उनमें से भी कई अपना मकान बनवा रहे थे। हालांकि अब काम रोक दिए गए हैं। उनके मकानों में उनसे जुड़ी महिला सदस्य पहुंचने लगे हैं। जो लोन लेकर निवेश किए गए रकम की वापसी की मांग कर रही है।

अखिलेश का घर, बाहर से झोपडी पर अंदर सर्वसुविधायुक्त

पेट्रोल पंप कर्मी बना कैशियर, भव्य मकान तैयार 

सेमीपाली निवासी मयाराम साहू लैंकों के पास के पेट्रोल पंप में काम करके परिवार चलाता था। उसकी पत्नी संतोषी साहू फ्लोरा मैक्स में सबसे पहली सदस्य बनी। 2 साल तक उसके घर के सामने ही कंपनी का सेंटर चलता रहा। तब तक पैसे का हिसाब-किताब कंपनी का डायरेक्टर अखिलेश ही रखता था। एक साल पहले शहर के सिटी सेंटर में शिफ्ट होने पर मयाराम को कैशियर बना दिया गया। इसके बाद मयाराम के दिन बदलने लगे। गाड़ियां तो खरीदी और सामान्य से मकान में गुजारा चलता था उसकी जगह तीन मंजिला भव्य मकान तैयार हो गया। सेमीपाली गांव का हर व्यक्ति मयाराम के तरक्की को देखकर हैरान था। अब कंपनी के ठगी कांड के बाद लोगों के बीच चर्चा है।

क्यूलाफ एप की तरह ही फ्लोरा मैक्स की स्कीम 

फ्लोरा मैक्स में जिस तरह से एक के बाद एक स्कीम लॉन्च किया जा रहा था और कारोबार के संचालन में अड़चन बताया गया उससे ऑनलाइन ठगी करके भागी क्यूलाफ एप की याद ताजा हो गई। जिसमें 400 करोड़ की ठगी हुई थी। उस ऑनलाइन एप की स्कीम की तर्ज पर ही फ्लोरा मैक्स की ऑफलाइन कारोबार चल रहा था। जिसमें रकम निवेश कराकर मुनाफा दिया जा रहा था। नीचे समूह को जोड़ने पर कमीशन भी। बड़ी रकम भी अलग से निवेश कराई जा रही थी। यहां तक कि आगे यूनिक कार्ड लॉन्च किया जा रहा था। 1 नवंबर को कंपनी से जुड़े खाते भी क्यूलाफ के तर्ज पर ही जांच एजेंसियों द्वारा होल्ड किया जाना बताया गया। इस दौरान कंपनी को डूबने से बचाने के लिए टीम लीडरों से रकम निवेश कराया गया। कई लीडरों से बड़ी रकम लोन में निकलवाया जा रहा था। जिससे पहले ठगी का मामला फूट गया।

इस तरह मिलता था कंपनी से वेतन-कमीशन 

टॉप-10 लीडर बनी शामिल कल्याणी, सरोजनी, हेम बाई, हेमा, पुनम, सरोजनी चंद्रा व ओमेश्वरी सेमीपाली गांव की है। अखिलेश ने उनके गांव पहुंचकर संतोषी साहू के माध्यम से उन्हें फ्लोरा मैक्स से जोड़ा। शुरूआत में प्रत्येक महिला को फ्लोरा मैक्स के यूट्यूब चैनल को 100 लोगों से सब्सक्राइब कराने पर प्रतिदिन 100 रुपए के हिसाब से महिने में 3 हजार मिलने की बात कही गई। उन्होंने ऐसा किया लेकिन पैसा नहीं मिला। अखिलेश ने पैसा मिलने में देरी होने पर सभी को 30-30 हजार लोन लेकर कंपनी में लगाने पर लाइफ टाइम के लिए घर बैठे 3 हजार रुपए मंथली मिलने का सपना दिखाया। लोन लेने के लिए उसने ही ट्रेनिंग दी। लोन लेकर अखिलेश के पास जमा किया। हर माह पैसा दिया जाने लगा। फिर 10 हजार रुपए महिना कमाने का तरीका बताकर 10-10 महिलाओं का संगठन बनाकर उन्हें बैंक से लोन दिलाकर उनकी तरह ही 30-30 हजार लगाने को बोला। अखिलेश ने एग्रीमेंट करके जिम्मेदारी खुद लेने की बात कही। उसकी बात में आकर ऐसा किया तो महिलाएं तैयार हो गई। हर महिने में 10 हजार मिलने लगा। इसी तरीके से महिलाएं जुड़ती गई। जिससे हमारा वेतन-कमीशन बढ़ने लगा।