50 लाख का गैस आधारित शव दाह गृह…संचालन से पहले ही हो गया मुर्दा
महानगर के तर्ज पर शुरू होने वाली थी सुविधा पर अब भी मुक्तिधाम में लकड़ी से अंतिम संस्कार
कोरबा। महानगरों की तर्ज पर शहर में मशीन में शव रखकर अंतिम संस्कार की सुविधा के लिए 50 लाख रुपए खर्च करके मोतीसागर पारा स्थित मुक्तिधाम में गैस चलित शव दाह गृह की स्थापना की गई। 5 साल बाद भी संचालन शुरू नहीं हुआ है और कबाड़ चोरों की करतूत से शव दाह गृह का हाल मुर्दा जैसा हो गया है।
कोरबा में महानगर की तर्ज पर सुविधाएं विकसित करने के लिए नगर निगम द्वारा लगातार कार्य कराए जा रहे हैं। पर्यावरण सुरक्षा व प्रदूषण नियंत्रण कर क्लीन सिटी बनाने के लिए भी कई योजना पर काम हो रहा है। शहर में शवों के अंतिम संस्कार में लकड़ियों के उपयोग से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को ध्यान में रखकर वर्ष 2020 में मोतीसागर पारा स्थित मुक्तिधाम में 50 लाख रुपए की लागत से गैस चलित शव दाह गृह की स्थापना की गई। लेकिन 5 साल बाद भी शव दाह गृह का संचालन शुरू नहीं हो सका है।

दूसरी ओर कबाड़ चोर मशीन में लगे महंगे पार्ट्स व बिजली केबल को चोरी कर ले गए हैं, ऐसे में मशीन कबाड़ में तब्दील होता जा रहा है। वहीं मुक्तिधाम में लकड़ी से शव जलाकर अंतिम संस्कार करने की मजबूरी बनी हुई है।
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जहां सुरक्षा के लिए पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। पीछे की ओर मजबूत दीवार की जगह ग्रील के खिड़कियां लगा दी गई। कीमती मशीन स्थापित होने की जानकारी होने पर कबाड़ चोरों ने खिड़की की ग्रील काटकर अंदर घुसने का रास्ता बनाया और वहां से घुसकर मशीन में लगे तांबे-पीतल के महंगे पार्ट्स निकालकर ले गए। बिजली केबल को भी काटकर ले गए। मुक्तिधाम के कर्मचारी के अनुसार शव जलाने के लिए मशीन लगने के बाद सुरक्षा के लिए कोई चौकीदार नहीं लगाया गया। पीछे की ओर से दीवार फांदकर वहां कबाड़ चोर पहुंचकर चोरी करते हैं।
ट्रायल के बाद नहीं पहुंचा शव, सिलेंडर ले गए कर्मी
शव दाह गृह में गैस चलित मशीन लगी है, कई वर्षो से संचालन शुरू नहीं होने पर नगर निगम के सभापति नूतन सिंह ठाकुर ने 6 माह पहले इस संबंध में विरोध जताया था। जिसके बाद शव दाह गृह का संचालन शुरू करने चोरी गए पार्ट्स की फिर से खरीदी करके मशीन को उपयोग में लाया गया, 10 गैस सिलेंडर लगाकर ट्रायल भी किया गया। लेकिन उसके बाद कोई शव नहीं पहुंचा तो फिर से शव दाह गृह में ताला लगा दिया गया। सभी गैस सिलेंडर निगम कर्मी उठाकर ले गए।
एक दिन में 12 शव के दाह संस्कार की क्षमता
कोरोना काल में लगातार मौत के बाद शवों के अंतिम संस्कार में हो रही परेशानी को देखते हुए शव दाह गृह स्थापना के लिए जोर दिया गया। योजना को स्वीकृति मिली और मोतीसागर पारा मुक्तिधाम में शव दाह गृह निर्माण कर गैस चलित मशीन स्थापित की गई। उक्त मशीन में 24 घंटे अर्थात एक दिन में 12 शव के दाह संस्कार की क्षमता है। एक शव के अंतिम संस्कार के पीछे 1 से 2 घंटे का समय निर्धारित है। हालांकि ज्यादातर समाज में दिन के उजाले में ही शव का अंतिम संस्कार किया जाता है।
अंतिम संस्कार से प्रदूषण व आर्थिक दिक्कत
मोतीसागर पारा मुक्तिधाम समेत शहर के सभी मुक्तिधामों में लकड़ी से ही शवों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था है। शोकाकुल परिवार को इसके लिए लकड़ी खरीदना पड़ता है। गरीब परिवार के लिए यह आर्थिक भार जैसा होता है। लकड़ी के जलने से धुआं उठने से पर्यावरण में प्रदूषण भी फैलता है। मोतीसागर पारा में शव दाह गृह शुरू होने पर वहां मुफ्त में शव का चंद घंटे के भीतर अंतिम संस्कार हो जाता। जिससे प्रदूषण नहीं फैलता और शोकाकुल परिवार को अंतिम संस्कार के लिए घंटों व अस्थि चुनने के लिए अलग से परेशान नहीं होना पड़ता।