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श्रम कानूनों के खिलाफ ट्रेड यूनियनों की हड़ताल जारी, कोल सेक्टर समेत उद्योगों में व्यापक असर, कांग्रेस का भी मिला समर्थन

रायपुर। देश की दस प्रमुख ट्रेड यूनियन और सौ से अधिक जन संगठनों के आह्वान पर केंद्र सरकार द्वारा लागू की जा रही चार श्रम संहिताओं एवं कथित जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आज प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी हड़ताल शुरू हो गई है। इस हड़ताल का सर्वाधिक असर कोयला उद्योग में देखा जा रहा है। इधर हड़ताल के समर्थन में बुधवार को राजधानी रायपुर में मशाल रैली निकाली गई। कर्मचारी भवन बूढ़ापारा से शुरू हुई रैली के बाद सभा का आयोजन किया गया। हड़ताल को कांग्रेस ने भी समर्थन दिया है।

सुबह 5 बजे से शुरू हो गई हड़ताल

कोल सेक्टर में बीएमएस को छोड़कर अन्य सभी श्रमिक संगठन हड़ताल पर हैं। कोरबा सहित अन्य जिलों में स्थित एसईसीएल की कोयला खदानों और वर्कशॉप में सुबह 5 बजे की पाली में इंटक सहित अन्य श्रमिक संगठन सक्रिय हो और गए और कर्मचारियों से हड़ताल के लिए समर्थन मांगा। इस पाली में अधिकांश श्रमिक अनुपस्थित रहे वहीं ड्यूटी के लिए जो भी कर्मचारी पहुंचे उनमें से आधे लौट गए।

एसईसीएल में साउथ ईस्टर्न कोयला मजदूर कांग्रेस (इंटक) के प्रमुख गोपाल नारायण ने टीआरपी को बताया कि कोलफील्ड में चल रही हड़ताल को लगभग 80% फीसदी कर्मचारी और मजदूरों का समर्थन मिल रहा है, और इसका कोल उत्पादन पर व्यापक असर पड़ रहा है।

गौरतलब है कि देश के दस प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, विभिन्न स्वतंत्र महासंघों और संगठनों ने 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी आम हड़ताल का आह्वान किया है। यूनियनों का आरोप है कि व्यापक विरोध के बावजूद अधिसूचित की गई चार श्रम संहिताएं श्रमिक हितों के प्रतिकूल हैं। उनका कहना है कि यह हड़ताल श्रमिकों के अधिकारों, सार्वजनिक उपक्रमों और व्यापक जनहित की रक्षा के लिए आयोजित की जा रही है।

इस हड़ताल के मद्देनजर रायपुर में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच के संयोजक धर्मराज महापात्र ने प्रदेश के सभी श्रमिकों से हड़ताल में बढ़-चढ़कर भाग लेने और इसे सफल बनाने की अपील की।

सीएसईबी में काली पट्टी लगाकर काम

इस हड़ताल को सीएसईबी की जनता यूनियन द्वारा भी समर्थन दिया जा रहा है। इस संगठन से जुड़े कर्मचारी आज काली पट्टी लगाकर काम कर रहे हैं। जनता यूनियन के उपाध्यक्ष टीपी गुप्ता ने बताया कि

ये हैं हड़ताल की प्रमुख मांगें :

राष्ट्रीय स्तर पर मांग

0 मजदूर विरोधी चारों लेबर कोड वापस लो।
0 न्यूनतम वेतन ₹26,000 प्रति माह हो।
0 सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों का निजीकरण बंद करो।
0 न्यूनतम पेंशन ₹9,000 प्रति माह हो।
0 ट्रेड यूनियन का पंजीयन आवेदन के 45 दिन में सुनिश्चित किया जाए।

कोयला उद्योग की मांगें

0 कमर्शियल माइनिंग और एमडीओ रेवेन्यू शेयरिंग बंद हो।
0 मेडिकल अनफिटनेस पूर्ववत चालू की जाए।
0 ठेका श्रमिकों का एचपीसी वेजेस और मेडिकल सुविधा सुनिश्चित हो।
0 20 लाख ग्रेच्युटी 01.01.2017 से लागू की जाए।
0 कोल इंडिया के शेयर बेचना बंद हो।

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