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धार्मिक आस्था की जीत: मड़वारानी मंदिर अधिग्रहण मामला, हाई कोर्ट ने प्रशासन को दिया मुआवजा भुगतान का आदेश

कोरबा।चांपा-उरगा नेशनल हाईवे (एनएच-149B) के निर्माण के लिए मड़वारानी स्थित मुख्य मार्ग किनारे का मड़वारानी मंदिर परिसर भूमि अधिग्रहण में शामिल किया गया था। अधिग्रहण के एवज में कुल ₹82.58 लाख मुआवजा निर्धारित किया गया था। प्रशासन द्वारा 28 नवंबर 2024 को पहली किश्त ₹30.73 लाख जारी की गई, लेकिन शेष ₹51.84 लाख की राशि लंबे समय तक लंबित रही।
मुआवजे की आंशिक राशि मिलने के बाद मंदिर को पुराने स्थल से हटाकर पास में पुनर्निर्माण कार्य शुरू किया गया, परंतु धन की कमी के कारण निर्माण कार्य अधूरा ही रुक गया। मुआवजा भुगतान में देरी से नाराज मड़वारानी सेवा समिति ने कई बार प्रशासन से मांग की, लेकिन सुनवाई नहीं होने पर अंततः न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने इसे गंभीर मानते हुए स्पष्ट कहा कि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद मुआवजा रोकना उचित नहीं है। न्यायालय ने प्रशासन को निर्देश दिया कि शेष ₹51.84 लाख की राशि 30 दिनों के भीतर मंदिर समिति को चेक या बैंक खाते के माध्यम से भुगतान किया जाए।
याचिकाकर्ता समिति की ओर से अधिवक्ता अमित कुमार चाकी ने पक्ष रखते हुए दलील दी कि मामला धार्मिक आस्था और जनभावनाओं से जुड़ा है तथा मुआवजा राशि को अनावश्यक रूप से रोका गया, जिससे मंदिर के पुनर्निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न हुई। उन्होंने न्यायालय के समक्ष यह भी रखा कि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भुगतान रोकना कानूनन उचित नहीं है।
मड़वारानी सेवा समिति के सचिव प्रियांशु सिंह ने कहा कि अधिग्रहण से प्राप्त पूरी राशि मंदिर के पुनर्निर्माण में ही उपयोग की जा रही है। उन्होंने हाई कोर्ट के आदेश को मड़वारानी देवी और श्रद्धालुओं की आस्था की जीत बताया।
कोर्ट के इस निर्देश के बाद अब लंबे समय से रुका मंदिर का पुनर्निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद है।

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