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नंद घर ने बच्चों में एनीमिया की पहचान के लिए शुरू किया टेक्नोलॉजी आधारित नॉन-इनवेसिव स्क्रीनिंग प्रोग्राम

रायपुर।नंद घर, जो अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के तहत वेदांता ग्रुप का फ्लैगशिप सोशल इम्पैक्ट इनिशिएटिव है, ने भारत के नंद घरों में एक नॉन-इनवेसिव और टेक्नोलॉजी-इनेबल्ड एनीमिया स्क्रीनिंग प्रोग्राम शुरू करने की घोषणा की है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य 2 से 6 वर्ष के बच्चों में एनीमिया की समय पर पहचान कर उसकी रोकथाम करना है।
ओडिशा में 531 और छत्तीसगढ़ में 262 नंद घरों के माध्यम से यह पहल हजारों बच्चों तक पहुंचेगी, जिससे पिछड़े और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रिवेंटिव हेल्थकेयर तक पहुंच मजबूत होगी। इस स्क्रीनिंग में बिना खून लिए और बिना सुई चुभोए बच्चों की जांच की जाएगी, जिससे बच्चों को डर और परेशानी से बचाया जा सकेगा।
कार्यक्रम में आधुनिक टेक्नोलॉजी और AI आधारित डेटा टूल्स का उपयोग किया जाएगा, जिससे रियल टाइम ट्रैकिंग, जोखिम की जल्द पहचान और जरूरत पड़ने पर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से समय पर जोड़ना संभव होगा। यह पहल ‘एनीमिया मुक्त भारत’, नेशनल हेल्थ पॉलिसी 2017 और पोषण 2.0 जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप है।
नंद घर के CEO शशि अरोड़ा ने कहा कि बचपन में एनीमिया अक्सर नजरअंदाज हो जाता है, जबकि इसका असर बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर लंबे समय तक पड़ता है। इस कार्यक्रम के जरिए नंद घर समुदाय के स्तर पर एनीमिया की पहचान को आसान और सुलभ बना रहा है।
वेदांता एल्युमिनियम के CEO राजीव कुमार ने कहा कि ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे क्षेत्रों में बच्चों की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटना उनकी प्राथमिकता है और यह पहल हर बच्चे को बेहतर भविष्य देने की दिशा में एक मजबूत कदम है।
एनीमिया भारत की बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। NFHS-5 के अनुसार देश में 5 वर्ष से कम उम्र के 67.1 प्रतिशत बच्चे एनीमिया से पीड़ित हैं। नंद घर का यह कार्यक्रम टेक्नोलॉजी और कम्युनिटी के सहयोग से एनीमिया रोकथाम का एक प्रभावी मॉडल बनेगा, जिसे आगे अन्य राज्यों में भी लागू किया जाएगा।

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