बाल्को में ऐतिहासिक आंदोलन…बिना नेता के जनता सड़क पर डटी, ठंड में अलाव जलाकर बैठे रहे लोग
आंदोलन को 24 घंटे होने वाले पर जनता की दर्द सुनने नहीं पहुंचे जिम्मेदार अधिकारी, बालको प्रबंधन को मिल रहा संरक्षण, जनता बेहाल

कोरबा। बाल्कोनगर के मुख्य सड़क पर मंगलवार सुबह जब राखड़ परिवहन से परेशान आम जनता ने आंदोलन शुरू किया तो लगा कि घंटे-दो घंटे में सब सेटिंग हो जायेगा और वहां से लोग किनारे कर दिए जायेंगे। बालकों के अधिकारियों ने भी इसके लिए दलाल लगा कर रखे थे, लेकिन डेढ़-दो वर्षों से परेशान लोग जब आंदोलन पर उतरे तो बाल्को नगर के लिए यह ऐतिहासिक हो गया, क्योंकि अब तक वहां बिना नेता या श्रमिक नेता के ऐसा कोई आंदोलन नहीं हुआ था जो रात भर चले। क्षेत्र की जनता ने दिखा दिया कि बिना नेता के भी जनता अपनी आवाज किस तरह बुलंद करती है। राष्ट्रीय ध्वज लगाकर कड़ाके की ठंड के बीच क्षेत्र की जनता आंदोलन स्थल पर रातभर अलाव जलाकर बैठी रही। कई लोग घरों से चद्दर-कंबल लेकर पहुंचे थे जो आसपास जगह देखकर सो गए। सुबह फिर से बड़ी संख्या में लोग आंदोलन स्थल पहुंच गए हैं। लोगों ने साफ कह दिया कि अब यह आंदोलन जब तक मांग पूरी नहीं होगी तब तक जारी रहेगी, चाहे इसके लिए अब कई दिन बैठना ही क्यों ना पड़े।

दरअसल बालको डैम से बालको की सड़क पर राखड परिवहन के कारण लोग बहुत परेशान थे। एक तो राखड सड़क पर गिर जा रहा था जिससे कीचड़ और धूल की दोहरी मार राहगीरों को झेलनी पड़ रही थी। स्थानीय लोग भी इससे परेशान थे ।सड़क पर बिना अंतराल के तेज रफ्तार में दौड़ती भरी वाहनों के चक्कर में लोग दुर्घटनाग्रस्त भी हो रहे थे। एक तरह से लोगों में राखड़ परिवहन या कहे तो बालको प्रबंधन के खिलाफ आक्रोश भरा था। मंगलवार की सुबह जब लगातार जा रहे वाहनों से रखड़ गिरता गया तो लोगों के आक्रोश का सब्र टूट गय। उन्होंने सड़क पर उतर कर भारी वाहनों को रोक दिया। हालाकि आम आवाजाही जारी रहने दिया। इसके बाद जब दोपहर तक जनता सड़क से नहीं हटी तो बालको प्रबंधन के दलाल पहुंचने लगे। वे प्रबंधन से चर्चा कर समस्या के हल का दावा करने लगे। जिसमें कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधि व कुछ नेतानगरी के लोग शामिल थे। जनता ने उन्हें साफ कह दिया कि यह किसी पार्टी या नेता के नेतृत्व में नहीं बल्कि आम जनता सड़क पर आंदोलन है। अब तक उनकी परेशानी के लिए जब कोई भी जनप्रतिनिधि व नेता सामने नहीं आ रहा था तो उन्हें मजबूर होकर खुद ही मोर्चा संभालना पड़ा। वे आंदोलन को राजनीति रंग नहीं देना चाहते। जनता की समस्या को लेकर मांग है और प्रशासन सीधे सुनेगी।

दूसरी ओर करीब 24 घंटे आंदोलन को होने वाले हैं, पर अब तक कोई भी प्रशासनिक अधिकारी जनता की समस्या सुनने नहीं पहुंचा है। इधर आंदोलन के कारण परसाभाठा बाजार से लेकर एक और दर्री होते कटघोरा और दूसरी ओर उरगा तक भारी वाहन जाम में फंसे हुए हैं।